Friday, March 23, 2012

इंतज़ार

शुक्रिया जनाब की आपको,

इस नाचीज़ की याद तो आयी!

ख़त को पढ़ते-पढ़ते,

हमारी तो आँख भर आयी!!


लाख कोशिशे करने पर भी,

भुला न सके हम आपको!

इस ख़तने तो जगा दिया,

सारे सोये ख्वाबोंको!!


लेकिन पता नहीं हुयी है,

हमसे कौनसी ऐसी ख़ता?

जिसकी सज़ा में आपने,

भेजा ख़त बिना कोई अता-पता!!


अब तो सिर्फ अगले ख़त पे,

आँखें लगाये बैठे हैं!

पता नहीं इस नए इंतज़ार की,

उम्र कितनी लम्बी हैं !

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