शुक्रिया जनाब की आपको,
इस नाचीज़ की याद तो आयी!
ख़त को पढ़ते-पढ़ते,
हमारी तो आँख भर आयी!!
लाख कोशिशे करने पर भी,
भुला न सके हम आपको!
इस ख़तने तो जगा दिया,
सारे सोये ख्वाबोंको!!
लेकिन पता नहीं हुयी है,
हमसे कौनसी ऐसी ख़ता?
जिसकी सज़ा में आपने,
भेजा ख़त बिना कोई अता-पता!!
अब तो सिर्फ अगले ख़त पे,
आँखें लगाये बैठे हैं!
पता नहीं इस नए इंतज़ार की,
उम्र कितनी लम्बी हैं !
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